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सपनों में जो‌ मिलती हैं, वो हकीकत में रुलाती हैं।

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अपनों से अपनों की दूरी,
क्या क्या रंग दिखाती है।
सपनों में जो‌ मिलती है,
वो हकीकत में रुलाती हैं।

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किसकी किससे हुई दिल्लगी
किसने किसको नजर किया
इश्क में देखा इश्क को किसने
किसके‌ दिल में असर किया।
नजर जब मिले‌ नजर से
जाने फिर क्यों शर्माती है
सपनों में जो‌ मिलती है,
वो हकीकत में रुलाती हैं।

सच में मुझको आज तक,
ये बात समझ न आई है
जिसको कभी पा न सकें
वो ही क्यों मुझे भाई है।
जो गीत कभी सोचा नहीं
वो गीत मन क्यों गाती है।
सपनों में जो‌ मिलती हैं,
वो हकीकत में रुलाती हैं।

✍️अस्मिता पटेल
वीरगंज नेपाल

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